19 Feb 2020
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युवराज सिंह की तरह कैंसर से जंग जीतकर मैदान पर की वापसी, और डेब्यू मैच में ठोक दिया शतक

युवराज सिंह की तरह कैंसर से जंग जीतकर मैदान पर की वापसी, और डेब्यू मैच में ठोक दिया शतक

February 14, 2020 04:53 PM
युवराज सिंह की तरह कैंसर से जंग जीतकर मैदान पर की वापसी, और डेब्यू मैच में ठोक दिया शतक

नई दिल्ली । साल 2011 के वर्ल्ड कप के हीरो रहे भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह को उस दौरान कैंसर था, ये अब हर कोई जानता है। कैंसर से लड़ाई लड़ने के बाद युवराज सिंह ने मैदान पर वापसी की। इसकी कहानी सभी को पता है। इसी बीच भारत में ऐसा ही एक और खिलाड़ी निकलकर सामने आया है जिसने कैंसर से जंग जीतने के बाद मैदान पर वापसी की और अपने पहले ही प्रोफेशनल मैच में शतक जड़ दिया।

हम बात कर रहे हैं युवा खिलाड़ी कमल कनियाल (Kamal Kaniyal) की, जिन्होंने महाराष्ट्र के खिलाफ उत्तराखंड की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी 2019-20 में डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में शतकीय पारी खेली। डेब्यू मैच में शतक ठोकना बड़ी बात है, लेकिन उससे भी बड़ी बात ये है कि उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी से लड़ाई लड़ने के बाद वापसी की और रणजी ट्रॉफी मैच में पहली ही पारी में शतक ठोका।

एक साल क्रिकेट से दूर रहे कनियाल

कमल कनियाल को 3 साल पहले ब्लड कैंसर हुआ था। ऐसे में वे करीब एक साल क्रिकेट से दूर रहे। ऐसे में कह सकते हैं कि उनकी कहानी भी युवराज सिंह के जैसी है। 18 महीने के बाद कनियाल ने वापसी की और दमदार पारी खेली। युवराज सिंह जिस तरह से ओल्ड विंटेज युवी नजर आए थे, उसी तरह कमल कनियाल भी अच्छी तरह से वापसी करने में सफल रहे हैं। कमल के शतक की बदौलत महाराष्ट्र के खिलाफ उत्तराखंड ने 44 रन की बढ़त हासिल की।
युवा बल्लेबाज कमल कनियाल ने अपनी टीम के लिए पारी की शुरुआत की। महाराष्ट्र के 207 रन के जवाब में उत्तराखंड ने 251 रन बनाए। कमल ने इस पारी में 17 चौकों की मदद से 160 गेंदों में 101 रन बनाए। इसके बाद महाराष्ट्र की टीम फिर से 313 रन पर ऑल आउट हो गई। इस तरह उत्तराखंड को जीत के लिए 270 रन बनाने हैं। इसके जवाब में मैच के तीसरे दिन उत्तराखंड ने 24 ओवर में 72 रन बना लिए हैं। कमल कनियाल 29 और नेगी 27 रन पर बल्लेबाजी कर रहे हैं।

डॉक्टरों ने भी उनके माता-पिता को भरोसा दिया था कि वह अच्छे से रिकवर कर सकेंगे। 16 साल की उम्र में उनका शरीर अच्छी तरह से रिकवर कर सकता है। इसके अलावा रिकवरी के समय वे पॉजिटिव माइंड के लोगों के साथ रहे, जिससे उनको काफी मदद मिली। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं जब 15 साल का था तो मुझे कैंसर हुआ था। मैंने एक साल तक कुछ नहीं किया। मुझे leukemia था और मेरे परिवार ने मुझे ज्यादा कुछ नहीं बताया था। मैं काफी बीमार था और मेरे प्लेटलेट्स गिर रहे थे। डॉक्टर ने कहा था कि रिकवरी के मौके ज्यादा हैं, अगर मैं खुश रहूं तो। मैंने ऐसा ही किया।"


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