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जानिये, महिलाये क्यों रखती है ये व्रत

जानिये, महिलाये क्यों रखती है ये व्रत

October 12, 2017 03:02 PM
जानिये, महिलाये क्यों रखती है ये व्रत

कार्तिक माह में कृष्‍ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती महिलाएं अपनी संतान और परिवार को किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए निर्जला व्रत रखती है और शाम को दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली अंकित करती हैं। इसे अहोई अष्टमी भी कहा जाता है। पुतली के पास स्याऊ माता और उनके बच्चों को बनाया जाता है। इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है।इसके पीछे मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है। इसलिए देश के कई भागों में इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस पूजा के पीछे एक प्राचीन कथा है।कथा के अनुसार एक साहूकार था। उसकी बहुएं दीपावली की तैयारियां कर रही थीं। इसके लिए अपने घर को चमकाने के लिए पास के वन से मिट्टी ले गई। तभी मिट्टी काटते समय उनकी छोटी बहु के हाथों से कांटे वाले पशु साही के बच्‍चे की मृत्यु हो गई।अपने बच्चे की मृत्यु से नाराज साही की मां ने बहु का श्राप दिया कि जिस तरह से उसका बच्चा उसे छोड़कर हमेशा के लिए चला गया, उसी तरह से उसकी कोख भी सूनी हो जाएगी। इस श्राप के बाद उसके सभी बच्चे मर गए।अपने बच्चों को फिर से जीवित करने के लिए साहूकार की बहू ने साही और मां भगवती की पूजा- आराधना करना शुरू किया। जिससे उसकी सभी संतान फिर से जीवित हो गई। 


 


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